मैं एक बेक़सूर वारदात की तरह जहाँ की तहाँ रही,तुम गवाहों के बयानो की तरह बदलते चले गए।
मैं एक बेक़सूर वारदात की तरह जहाँ की तहाँ रही,
तुम गवाहों के बयानो की तरह बदलते चले गए।
जिस्मों से खेलने वाला मोहब्बत क्या करेगा,
वो गुनाहों का देवता है, इबादत क्या करेगा…
इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से
मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँ नहीं करते
इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए
ये इश्क़ मोहब्बत की रिवायत भी अजीब है
पाया नहीं है जिसको उसे खोना भी नहीं चाहते