ख़ुद को इतना भी न बचाया कर,
बारिशें हुआ करे तो भीग जाया कर।
कांटे तो नसीब में आने ही थे ।
फूल जो हमने गुलाब का चुना था ।
इस कदर हम उनकी मोहब्बत में खो गये,
बस एक नजर पड़ी और हम उनके हो गये.
सर्दी में दिन सर्द मिला
हर मौसम बेदर्द मिला
अब इतनी देर भी ना लगा, ये हो ना कहींतू आ चुका हो और तेरा इंतज़ार हो।
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुम ने मिरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा