ख़ुद को इतना भी न बचाया कर,
बारिशें हुआ करे तो भीग जाया कर।
बड़े ही चुपके से भेजा थामेरे महबूब ने मुझे एक गुलाबकम्बख्त उसकी खुशबू नेसारे शहर में हंगामा कर दियाHappy Rose Day
“अपनों को याद करना प्यार हैं,
गैरों का साथ देना संस्कार हैं,
दुश्मनो को माफ करना उपकार हैं,
और आप जैसे दोस्तों को परेसान करना जन्मसिद्ध अधिकार हैं.”
कही से ये फिजा आई
ग़मों की धुप संग लायी
खफा हो गये हम, जुदा हो गये हम....
Tum Laut k anay ka takalluf mat
Karna,
Hum Ek mohabbat ko Do baar Nahi kartay…