कोरा कागज था मन मेरा जिस
पर नाम है,था, सिर्फ और सिर्फ तेरा
किसी और के पास कम से कम आबाद तो होगाहमारे पास कुछ था भी तो नहीं सिवाय बेबसी के
किसी और के पास कम से कम आबाद तो होगा
हमारे पास कुछ था भी तो नहीं सिवाय बेबसी के
" 'तुम ठीक हो' मेरे पूछने पे,जवाब 'हाँ' में आना ही..आज किसी मोह्हबत वाली,बात से जादा सुकून देता है l"
"जब शाम मिलता है, रात से,
उस वक़्त कभी, मुझसे मिलो ना,
सामने अंधेरा हो,पीछे उजाला हो,
चिराग इश्क़ का,उस पहर जलाओ ना l"
ये कैसा सरूर है तेरे इश्क का मेरे मेहरबाँ,
सँवर कर भी रहते हैं बिखरे बिखरे से हम!