कब आया, कब चला गया,कोई लुढ़कता सामान हो जाता हूँ,पेट की आग बुझाने को,रहता हूँ घर से दूर,कब आया, कब चला गया,अपने घर में भी, मेहमान हो जाता हूँ l
नजरिया देखने का नज़र में हो,तभी कुछ सुंदर नज़र आता है lवरना आइना को क्या पता,हर आँख को ख्वाब कैसे आता है l
मुझे खामोश राहों मै तेरा साथ चाहिए
तन्हा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए
जूनून-ए -इश्क को तेरी ही सौगात चाहिए
मुझे जीने के लिए तेरा ही प्यार चाहिए
चेहरे पर तेरे सिर्फ मेरा ही नूर होगा,
उसके बाद फिर तू न कभी मुझसे दूर होगा,
जरा सोच के तो देख क्या ख़ुशी मिलेगी, जिस पल तेरी मांग में मेरे नाम का सिंदूर होगा।
“Happy Valentine’s Day”
भले ही किसी गैर की जागीर थी वो,
पर मेरे ख्वाबों की भी तस्वीर थी वो,
मुझे मिलती तो कैसे मिलती,
किसी और के हिस्से की तक़दीर थी वो
तारे और इंसान में कोई फर्क नहीं होता,दोनो ही किसी की ख़ुशी के लिऐ खुद को तोड़ लेते हैं।