कब आया, कब चला गया,कोई लुढ़कता सामान हो जाता हूँ,पेट की आग बुझाने को,रहता हूँ घर से दूर,कब आया, कब चला गया,अपने घर में भी, मेहमान हो जाता हूँ l
आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा
किसी ने मुझे कहा की तुम हर रोज,
सुबह सुप्रभात करके सबको याद करते हो,
तो क्या वो भी तुम्हे याद करते है मेंने कहा,
मुझे रिश्ता निभाना है मुकाबला नहीं करना!
Good Morning
मिर्ज़ा ग़ालिब:हमें तो अपनों ने लूटागैरो में कहाँ दम थाअपनी कश्ती वहां डूबीजहां पानी कम थाग़ालिब की पत्नी:तुम तो थे ही गधेतुम्हारे भेजे में कहाँ दम थावहां कश्ती लेकर गए ही क्योंजहाँ पानी कम था!!
जिनकी याद तुम्हें खुशी के लम्हों में आई
समझो कि तुम उन्हें प्यार करते हो
और जो गम में याद आए
जान लो वो तुम्हें प्यार करते हैं