थोड़ा काजल लगा लिया एक बिंदी लगा लिया…
खुद तो सज गए हुजूर पर हमें तबाह कर दिया..
"माँ' तुम्हारा होना, सारी कमी पूरी कर देता है,मकान को घर , आसमां को जमीं कर देता है l"
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
ज़िन्दगी से ज्यादा बस इतनी फरमाइश है
की अब तस्वीर से नहीं
तफसील से मिलने की ख्वाइश है |
दोस्त बनकर भी वो नहीं साथ निभानेवाला,
वही अंदाज़ है उस ज़ालिम का ज़माने वाला।
हम तो बने ही थे तबाह होने के लिए,
तेरा छोडकर जाना तो महज बहाना था..!!