जिस की आँखों में कटी थीं
सदियाँ उस ने सदियों की जुदाई दी है
बन के एक हादसा बाज़ार में आ जायेगा,
जो नहीं होगा वो अख़बार में आ जायेगा
चोर उचक्कों की करो क़द्र के मालुम नहीं,
कौन, कब, कौनसी, सरकार में आ जायेगा
कभी कभी तो छलक पड़ती हैं यूँही आँखें
उदास होने का कोई सबब नहीं होता
दोस्त बनकर भी वो नहीं साथ निभानेवाला,
वही अंदाज़ है उस ज़ालिम का ज़माने वाला।
वो जब पास मेरे
होगी तो शायद
क़यामत होगी...!!
अभी तो उसकी
तस्वीर ने ही तबाही
मचा रखी है...!!!