मिली थी जिन्दगी किसी के “काम” आने के लिए,
पर वक्त बीत रहा है क़ागज के टुकड़े कमाने के लिए…
किसी को काँटों से चोट पहुंची
किसी को फूलों ने मार डाला
जो इस मुसीबत से बच गए थे
उन्हें उसूलों ने मार डाला
उन परिंदो को कैद करना...
मेरी फितरत में नहीं...
जो मेरे दिल के....
पिंजडे में रहकर भी....
गैरों के साथ....
उड़ने का शौक रखते है ।।
वो शख्स जो कहता था तू न मिला तो मर जाऊंगा "फ़राज़"वो आज भी जिंदा है यही बात किसी और से कहने के लिए
वो कहता है… कि मजबूरियां हैं बहुत…
साफ लफ़्ज़ों में खुद को बेवफा नहीं कहता।