ना कर तू इतनी कोशिशे,मेरे दर्द को समझने की,पहले इश्क़ कर,फिर ज़ख्म खा,फिर लिख दवा मेरे दर्द की।
ना कर तू इतनी कोशिशे,
मेरे दर्द को समझने की,
पहले इश्क़ कर,
फिर ज़ख्म खा,
फिर लिख दवा मेरे दर्द की।
तुम जाने दो सबको तारो के शहर में,तुम मेरे साथ केदारनाथ चलना।
उन परिंदो को कैद करना...
मेरी फितरत में नहीं...
जो मेरे दिल के....
पिंजडे में रहकर भी....
गैरों के साथ....
उड़ने का शौक रखते है ।।
तमन्नाओ की महफ़िल तो हर कोई सजाता है ,
ए दोस्तों.....
लेकिन पूरी उसकी ही होती है जो तक़दीर लेकर आता है .