Bade hi chupke se bheja tha,
Mere mehbub ne muje ek gulab,
Kambhakht uski khusbu ne ,
Sare shehar me hungama kar diya.
दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे,यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे,वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे..
इक अजीब सी बेताबी है
तेरे बिन रह भी लेते हैं
और
रहा भी नहीं जाता