मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत कामैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
बातों ही बातों में कोई बात बुरी लग जाती है,इस लिए वो महीने में कई बार मुझसे लड़ जाती है lपूछता हूँ कि बात क्या है.. उसे भी याद नहीं,नाराज़ होती है फिर बात उसे कहाँ याद रह जाती है l
"कई पुरानी यादें, खोल आया हूँ,सालो बाद, फिर तेरे शहर में आया हूँ,वो चौराहे, वो सड़क, सब वैसा ही है,बस एक तू नहीं, जिससे मिलने आया हूँ l"
लफ़्ज़ों में क्या तारीफ़ करूँ आपकी,
आप लफ़्ज़ों में कैसे समा पाओगे,
जब लोग हमारे प्यार के बारे में पूछेंगे,
मेरी आँखों में जानेमन सिर्फ तुम नज़र आओगे।
“Happy Valentine’s Day Sweetheart”