आदत नहीं पीठ पीछे बुराई करने की
दो लफ्ज़ कम बोलता हूं पर सामने बोलता हूं ।
बर्बाद कर गए वो ज़िंदगी प्यार के नाम से,
बेवफाई ही मिली हमें सिर्फ वफ़ा के नाम से,
ज़ख़्म ही ज़ख़्म दिए उस ने दवा के नाम से,
आसमान रो पड़ा मेरी मोहब्बत के अंजाम से।
दर्द मिन्नत-कशे- ✒ दवा न हुआ,
मै न अच्छा हुआ बुरा न हुआ,
जमा करते हो क्यों रकीबो को,
एक तमाशा हुआ गिला न हुआ.
माँ-बेटी के रिश्ते की बस यही सच्चाई है,बेटी को देखा तो लगा "माँ" की परछाई है l
चेहरे पर तेरे सिर्फ मेरा ही नूर होगा,
उसके बाद फिर तू न कभी मुझसे दूर होगा,
जरा सोच के तो देख क्या ख़ुशी मिलेगी, जिस पल तेरी मांग में मेरे नाम का सिंदूर होगा।
“Happy Valentine’s Day”
ये इश्क़ मोहब्बत की रिवायत भी अजीब है
पाया नहीं है जिसको उसे खोना भी नहीं चाहते