लौटकर आया हूँ फिर से मैदान मै?
अंदाज वही है सिर्फ तरीका बदल गया है!
उन परिंदो को कैद करना...
मेरी फितरत में नहीं...
जो मेरे दिल के....
पिंजडे में रहकर भी....
गैरों के साथ....
उड़ने का शौक रखते है ।।
नाम क्या दूँ मैं अपनी दीवानगी को..
बेचैनी दिल की तड़पने लगी है..
इस रवानगी से में क्या कहूँ..
जो हर पल तुम्हे याद करने लगी है.
Happy Hug Day.
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है
मोहब्बत का नतीजा दुनिया में हमने बुरा देखा
जिन्हे दावा था वफा का उन्हें भी हमने बेवफा देखा