Tumhe sawan pasand hain... Mujhe sawan mein tum
Tumko Bheegna pasand hain.. Mujhe bheegte hue tum
ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
अपने मेयार से नीचे तो मैं आने से रहा
शेर भूखा हो मगर घास तो खाने से रहा
कर सको तो मेरी चाहत का यकीन कर लेना
अब तुम्हें चीर के मैं दिल तो दिखाने से रहा
नज़रें मिल जाएं तो प्यार हो जाता है,
पलकें उठ जाएं तो इज़हार हो जाता है,
ना जाने क्या कशिश है आपकी चाहत में,
कि कोई अनजान भी...
Zindagi Ne Kai Sawaal Badal Diye,
Waqt Ne Mere Halaat Badal Diye,
Itne Bure Nahin Hai Hum,
Na Jaane Kyu Logon Ne Apne
Khayaal Badal Diye…