सुना है उस के लबों से गुलाब जलते हैं
सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की
और हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए
हम तो बने ही थे तबाह होने के लिए,
तेरा छोडकर जाना तो महज बहाना था..!!
मेरी बर्बादी पर तू कोई मलाल ना करना,भूल जाना मेरा ख्याल ना करना,हम तेरी ख़ुशी के लिए कफ़न ओढ़ लेंगे,पर तुम मेरी लाश ले कोई सवाल मत करना!