तेरे खामोश होंठों पर मोहब्बत गुनगुनाती है,तू मेरा है मैं तेरा हूँ बस यही आवाज़ आती है।
मतलब की बात सब समझ लेते है
लेकिन बात का मतलब बहुत कम लोग ही समझ पाते है।
सर झुकाने की आदत नहीं है,
आँसू बहाने की आदत नहीं है,
हम खो गए तो पछताओगे बहुत…
क्योंकि हमे लौट कर आने की आदत नहीं है.
हक़ से अगर दे दो,
नफरत भी कबूल है हमे,
खैरात में तो हम…
तुम्हारी महोब्बत भी न ले.
जिन फूलों को संवारा था
हमने अपनी मोहब्बत से,
हुए खुशबू के काबिल तो
बस गैरों के लिए महके।
तेरी यादों की कोई सरहद होती तो अच्छा था
खबर तो रहती….सफर तय कितना करना है