“तेरे बाद
हमने दिल का दरवाजा खोला ही नहीं
वरना बहुत से चाँद आये
इस घर को सजाने के लिए”
“काश...तुम मेरे होते,
और ये अल्फ़ाज़ तुम्हारे होते।”
दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला
मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
वो शख्स जो कहता था तू न मिला तो मर जाऊंगा "फ़राज़"वो आज भी जिंदा है यही बात किसी और से कहने के लिए