उसको चाहा पर इजहार करना नही आया,
कट गयी उम्र हमें प्यार करने नही आया,
उसने कुछ माँगा भी तो मागी रजाई,
और हमे इंकार करना नही आया....
उनका भी कभी हम दीदार करते है,उनसे भी कभी हम प्यार करते है,क्या करे जो उनको हमारी जरुरत न थी,पर फिर भी हम उनका इंतज़ार करते है..!!
किस कदर अनजान है यह सिलसिला -ए-इश्क भी,मोहब्बत तो कायम रहती है मगर इंसान टूट जाते है!
सिर्फ इतना ही कहा है, प्यार है तुमसे,जज्बातों की कोई नुमाईश नहीं की,प्यार के बदले सिर्फ प्यार मांगती हूँ,रिश्ते की तो कोई गुज़ारिश ही नहीं की..
एक रास्ता यह भी है... मंजिलो को पाने का.... कि सीख लो तुम भी हुनर... हाँ में हाँ मिलाने का...