अब तो मुझको लोग तेरे नाम से पहचानते हैंदिल्लगी में रुतबा हमने भी पाया है
अब तो मुझको लोग तेरे नाम से पहचानते हैं
दिल्लगी में रुतबा हमने भी पाया है
हमने अपनी यादों के बागीचे में
तेरी यादों के पौधे को सींच कर रख रखा था
पर आप हमे अपनी यादों के बगीचे में
लगी गंदी घास समझ कर भूल गये।
है कठिन तो ये घड़ी पर,वक़्त से लड़ जायेंगे..हम परिंदे आसमां के,पंख ले उड़ जायेंगे...
एक रोज निकाल कर सारे पुराने ख़त पढ़ लेना,हर ख़त का एक ही जवाब 'मोह्हबत' लिख देना l
"उनकी नज़र में, मैं कभी बड़ा ना पाया,माँ तुमने आज तक मेरी उम्र ना बढ़ने दी l"
तुम्हारे इश्क़ का मौसम,
हर मौसम से सुहाना होता है