परिंदो को मिलेगी मंज़िल एक दिन,ये फैले हुए उनके पर बोलते है,और वही लोग रहते है खामोश अक्सर,ज़माने में जिनके हुनर बोलते है 😌😌😌
परिंदो को मिलेगी मंज़िल एक दिन,
ये फैले हुए उनके पर बोलते है,
और वही लोग रहते है खामोश अक्सर,
ज़माने में जिनके हुनर बोलते है 😌😌😌
तुमने समझा ही नहीं और ना समझना चाहा,हम चाहते ही क्या थे तुमसे “तुम्हारे सिवा
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दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
तू बन जा मेरी कि इस कदर चाहूंगा तुझे
कि लोग दुआ करेंगे तुझसा नसीब पाने के लिए
तुम शराफ़त को बाज़ार में क्यूँ ले आए हो…
दोस्त
ये सिक्का तो बरसों से नहीं चलता…!!