दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैंज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं
मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर मेंमगर यहाँ भी समन्दर निकलने लगते हैं
नए साल की आने वाली हर शाम सिर्फ तेरे ही नाम,
होगी चाहत की एक अलग मुकाम,
करेंगे मोहब्बत तुमसे सुबह शाम।
HAPPY NEW YEAR 2021
वक़्त भी लेता है करवटें कैसी कैसी,
इतनी तो उम्र भी ना थी जितने सबक सीख लिए हमने..
कभी कभी मिटते नही, चंद लम्हों के फांसले एहसास अगर जिन्दा हो,मिट जाती है दूरियाँ.