"सारा ज़माना, सप्ताह की परेशानी सी लगती है,तुमसे मिलना, रविवार वाली आसानी सी लगती है l"
"मिले ना मिले कहीं, उसके साथ चलना है,जैसे चलती दो पटरियाँ, वैसे साथ रहना है l"
"मिल जायेगी बरसो पहले हो चुकी बेवफ़ा,पर आज शहर में साँसो को हवा ना मिलेगी l"
"दो कदम के फासले से, इश्क़ में हम हार गये,एक उन से ना तय हो सका, एक हम ना कर सके l"
मतलब की बात सब समझ लेते है
लेकिन बात का मतलब बहुत कम लोग ही समझ पाते है।
शायरी मे सिमटते कहाँ हैँ दिल के दर्द दोस्तों
बहला रहे हैँ खुद को जरा कागजो के साथ