कुछ बातें इतनी गंभीर होती है,कि वो केवल मजाक में ही कि जा सकती है
बात दिन की नहीं, अब रात से डर लगता है
घर है कच्चा मेरा बरसात से डर लगता है
प्यार को छोड़ कर तुम और कोई बात करो
अब मुझे प्यार की हर बात से डर लगता है
वो नहीं आते पर निशानी भेज देते हैख्वाबो में दास्ताँ पुरानी भेज देते हैकितने मीठे है उनकी यादो के मंज़रकभी कभी आँखों में पानी भेज देते है
Taras gaye apke deedar ko,
phir bhi dil aap hi ko yaad karta hai,
humse khusnaseeb to apke ghar ka aaina hai,
jo har roz apke husn ka deedar karta hai…
नहीं ‘मालूम ‘हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है,बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।