आओ आगोश में कि ,इश्क का अंजाम हो जाएँ,थोड़ा बुझें थोड़ा जलें ,आज की शाम हो जाए।
आओ आगोश में कि ,इश्क का अंजाम हो जाएँ,
थोड़ा बुझें थोड़ा जलें ,आज की शाम हो जाए।
बहुत कुछ कहना था,पर कैसे और क्या,ये समझ नहीं आया,तो हाँथ पकड़,उसने कहा 'बस',मैने भी साँसे रोक,ज़रा जोर से दबा दिया l
सुबह की ठंडी हवा,एक प्याली गर्म चाय,तुमसे थोड़ी बात,इतनी खुमारी बहुत हैlदिन भर के ताजगी के लिए l
चेहरे पर हंसी और आँखों में नमी सी है.
हर सांस कहती है आपकी कमी सी है..
किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है
आप तो अंदर है फिर बाहर कौन है..