कागज़ पे लिखी कुछ लाइन ऐसी भी होती है,
किसी को हँसा और किसी को रुला जाती है,
हम उसे याद बहुत आएँगे
जब उसे भी कोई ठुकराएगा
इश्क़ है या इबादत
अब कुछ समझ नहीं आता,
एक खूबसूरत ख्याल हो तुम
जो दिल से नहीं जाता।
मेरे दर्द को भी आह का हक़ हैं,
जैसे तेरे हुस्न को निगाह का हक़ है
मुझे भी एक दिल दिया है भगवान ने
मुझ नादान को भी एक गुनाह का हक़ हैं
मुझे आदत नहीं
यूँ हर किसी पे मर मिटने की
पर तुझे देखकर दिल ने
सोचने तक की मोहलत ना दी