दिल की धड़कन को कौन समझेगा।
मेरी उलझन को कौन समझेगा।
एक बेटी नहीं अगर घर में
घर के आंगन को कौन समझेगा।
तुम पगडंडी हो महलों की मैं खेतों वाली राह प्रियेतुम होटल वाली कॉफी सी मैं अदरक वाली चाय प्रिये
तुम पगडंडी हो महलों की मैं खेतों वाली राह प्रिये
तुम होटल वाली कॉफी सी मैं अदरक वाली चाय प्रिये
वक़्त पर न जा क्योंकि वक़्त तो हर जख्म की दवा है…
आज तुमने हमें भुला दिया कल तम्हें कोई और भुला देगा…
काश ! कोई इस रात की शहर रोक लेता ,काश ! आज कोई मुझे अपने घर रोक लेता l
माँ की सी मुझे नज़र दे ऐ खुदाकि ज़माना मुझे फिर बुरा न लगे।