तुम पगडंडी हो महलों की मैं खेतों वाली राह प्रियेतुम होटल वाली कॉफी सी मैं अदरक वाली चाय प्रिये
तुम पगडंडी हो महलों की मैं खेतों वाली राह प्रिये
तुम होटल वाली कॉफी सी मैं अदरक वाली चाय प्रिये
मजबूती से बाहों में,
इस कदर थाम लूं तुझे…
की मेरे इश्क़ की कैद सेतू चाहकर भी ना छुड़ सकें…❤️
Jab bhi Dekhta hu Tumhe
Lagta hai ye Din Naya hai
Nigahein Tumko Dekhna Chahti hai
Mere Dilko ye kya hua hai
इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये..कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता।
“हमारे आंसूं पोंछ कर वो मुस्कुराते हैं,
उनकी इस अदा से वो दिल को चुराते हैं,
हाथ उनका छू जाये हमारे चेहरे को,
इसी उम्मीद में हम खुद को रुलाते हैं।”