रोज़ यही शिकवा आगोश में खिलते क्यूँ नहीं,
मुलाक़ात करते हो आए दिन मिलते क्यूँ नहीं.
कल रात भर मैं, ख्वाब में उसके,आगोश में रहा,ख्वाब ही सही, मगर कुछ #पल तो,मैं उनका रहा.
कल रात भर मैं, ख्वाब में उसके,
आगोश में रहा,
ख्वाब ही सही, मगर कुछ #पल तो,
मैं उनका रहा.
अब शामे खत्म तुमसे,अब सुबह शुरू तुमसे ,बचे निशा के कुछ पल,उसमे नींद भी तुमसे,सोयी आँखों के सपने भी तुमसे l
अभी कुछ वक़्त और ठहराना होगा,पिघलने से पहले और तपना होगा l
"हर सुबह अंतिम और शाम आख़री हो सकती है,दो पल की ज़िंदगी, एक पल में बड़ी हो सकती है,
बीते साल को भूल जाएँ
आने वाले साल को गले लगाएँ
करते हैं हम प्रार्थना ईश्वर से
इस साल सारे सपने पूरे हों आपके
नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं