गुस्सा करूँ तुम पर कभी कभी मैं भी सोचता हूँ, पर इसको समझने का प्यार तुझमे नहीं सोचकर ये हँसता हूँ। 🤗😫
गुस्सा करूँ तुम पर कभी कभी मैं भी सोचता हूँ,
पर इसको समझने का प्यार तुझमे नहीं सोचकर ये हँसता हूँ। 🤗😫
मेरे दर्द को भी आह का हक़ हैं,
जैसे तेरे हुस्न को निगाह का हक़ है
मुझे भी एक दिल दिया है भगवान ने
मुझ नादान को भी एक गुनाह का हक़ हैं
तरस जाओगे हमारे मुँह से सुनने को एक लव्ज़
प्यार की बात क्या, हम शिकायत भी ना करेंगे…
गुज़र गया वो वक़्त जब तेरे तलबगार थे हम.
अब खुद भी बन जाओ तो सजदा न करेंगे..!
कितने आंसू बहूँगा उस बेवफा के लिए
जिसको खुदा ने मेरे नसीब मैं लिखा ही नहीं….
मेरे-तेरे इश्क़ की छाँव में… जल-जलकर!
काला ना पड़ जाऊ कहीं !
तू मुझे हुस्न की धुप का
एक टुकड़ा दे…!