“निकल आते हैं आँसू गर जरा सी चूक हो जाये,
किसी की आँख में काजल लगाना खेल थोड़े ही है।”
शाम की लाली रात का काजल सुबह की तक़दीर हो तुम,
हो चलता फिरता ताजमहल सांसे लेता कश्मीर हो तुम!!
ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझहम अपने शहर में होते तो घर चले जाते
"थक सी गई है नज़र, इंतजार में उसके,अब दिखे वो तो आँखों का रविवार हो l"