यह चमत्कार केवल “विश्वास” ही कर सकता हैं,
जो पत्थर को भी “भगवान” कर सकता हैं.
“निकल आते हैं आँसू गर जरा सी चूक हो जाये,
किसी की आँख में काजल लगाना खेल थोड़े ही है।”
शाम की लाली रात का काजल सुबह की तक़दीर हो तुम,
हो चलता फिरता ताजमहल सांसे लेता कश्मीर हो तुम!!
यूं वक़्त को बर्बाद न किया कर,
गर वक़्त चाहे तो तुझे बर्बाद कर देगा !!
मीलों का सफर एक पल में बर्बाद हो गया…
जब अपनों ने कहा कहो कैसे आना हुआ…!!
सहारे ढूढ़ने की आदत नहीं हमारी,
हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर हैं।