मैं एक बेक़सूर वारदात की तरह जहाँ की तहाँ रही,तुम गवाहों के बयानो की तरह बदलते चले गए।
मैं एक बेक़सूर वारदात की तरह जहाँ की तहाँ रही,
तुम गवाहों के बयानो की तरह बदलते चले गए।
एक मुलाक़ात दो प्याली चाय हम और तुमऔर बातें बेहिसाब कहिये मंजूर है जनाब
एक मुलाक़ात दो प्याली चाय हम और तुम
और बातें बेहिसाब कहिये मंजूर है जनाब
दिल का दीपक कुछ ऐसे जल जाये,पत्थर में भी मोह्हबत उतर आये
इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
मेरी तन्हाई का जो क़िस्सा है,
उसमें चाय का एक अहम हिस्सा हैं.