शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’
सुर्ख आँखे,गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’
और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया
आप की याद आती रही रात भर
चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर
हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में
रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चाँद
ज़िंदगी से यही गिला है मुझेतू बहुत देर से मिला है मुझे