जिस्म छू के तो सब गुज़रते हैं,रूह छूता है कोई हजारों में…
किसी भी मुशकिल का अब किसी को हल नही मिलता ,
शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नही निकलता
आज एक स्वेटर और पहन लो,
आज एक रज़ाई और ओढ़ लो,
आज एक मफ़लर और लपेट लो,
आज दो मोज़े और पहन लो,
आज एक कहवा और पी लो,
आज एक हीटर और चला लो,
क्या पता…
कल ठण्ड हो न हो…!!!
Happy Winter
ऐ बेदर्द… सब आ जातें हैं यूँ ही मेरी ‘ख़ैरियत’ पूछने…अगर तुम भी पूछ लो तो यह ‘नौबत’ ही न आए.
बात दिन की नहीं, अब रात से डर लगता है
घर है कच्चा मेरा बरसात से डर लगता है
प्यार को छोड़ कर तुम और कोई बात करो
अब मुझे प्यार की हर बात से डर लगता है