"सारा ज़माना, सप्ताह की परेशानी सी लगती है,तुमसे मिलना, रविवार वाली आसानी सी लगती है l"
"मिल जायेगी बरसो पहले हो चुकी बेवफ़ा,पर आज शहर में साँसो को हवा ना मिलेगी l"
"दो कदम के फासले से, इश्क़ में हम हार गये,एक उन से ना तय हो सका, एक हम ना कर सके l"
हर रात को तुम इतना
याद आते हो के हम भूल गए हैं,
के ये रातें ख्वाबों के लिए होती हैं,
या तुम्हारी यादों के लिए
इश्क की शुरुआत निगाहों से होती है
सजा की शुरुआत गुनाहों से होती है
कहते हैं इश्क भी एक गुनाह है
जिसकी शुरुआत दो बेगुनाहों से होती है