हे मेरे भोले नाथ अगर मैं खामोश हूँ तो क्या…
आप ही कभी आवाज दे दीजिए…
मुझे भी तो अहसास हो जाए कि आप भी बेचैन हैं मेरे लिए…
हर हर महादेव
हर रोज, चुपके से, निकल आते हैं नये पत्ते ।यादों के दरख़्तों में, मैंने, कभी पतझड़ नहीं देखा ।।
फिर उम्मीदों भरी सुबह आई
सूरज को साथ ले आई
हमारी दोस्ती काा ये असर भी तो देखो
हवाएं आपको गुड मॉर्निंग कहने आई
दिल मुझे उस गली में ले जा कर
और भी ख़ाक में मिला लाया
सब कुछ झूठ है
लेकिन फिर भी बिलकुल सच्चा लगता है…
जानबूझकर धोखा खाना कितना अच्छा लगता है
एक छुपी हुई पहचान रखता हूँ,
बाहर शांत हूँ, अंदर तूफान रखता हूँ,
रख के तराजू में अपने दोस्त की खुशियाँ,
दूसरे पलड़े में मैं अपनी जान रखता हूँ।