हर रोज, चुपके से, निकल आते हैं नये पत्ते ।यादों के दरख़्तों में, मैंने, कभी पतझड़ नहीं देखा ।।
खुदा की फुर्सत में एक पल आया होगा,
जब उसने तुझ जैसा प्यारा इंसान बनाया होगा,
न जाने कौन से दुआ कुबूल हुई हमारी,
जो उसने मुझे तुझसे मिलाया होगा
जब भी करीब आता हूँ बताने के लिये,जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये,महफ़िलों की शान न समझना मुझे,मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये।
दिल से जो भी मांगोगे मिलेगा,
ये गणेश जी का दरबार है,
देवों के देव वक्रतुंडा महाकाया को,
अपने हर भक्त से प्यार है।
तेरी साँसों में बिखर जाऊं तो अच्छा है,
बन के रूह तेरे जिस्म मे उतार जाऊं तो अच्छा है,
किसी रात तेरी गोद में सर रख कर सो जाऊं,
उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा है