तेरे आने से ये शाम
और खूबसूरत बन जाती हैं
फिजा भी रंग बदलती है
जब तू आंखों में काजल लगाती हैं
अंधेरों का डर यहाँ किस को है….
डर तो उसका है जो उजालो में ना हो सका!
तुम समझ लेना बेवफा मुझको, मै तुम्हे मगरूर मान लूँगा
ये वजह अच्छी होगी , एक दूसरे को भूल जाने के लिये
पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैंज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं
मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर मेंमगर यहाँ भी समन्दर निकलने लगते हैं
मुझसे वादा करो मुझे रुलाओगे नहीँ
हालात जो भी हो मुझे भुलाओगे नहीं