तेरे आने से ये शाम
और खूबसूरत बन जाती हैं
फिजा भी रंग बदलती है
जब तू आंखों में काजल लगाती हैं
अब ये हसरत है कि सीने से लगाकर तुझको
इस क़दर रोऊँ की आंसू आ जाये
वो इस तरह मुस्कुरा रहे थे , जैसे कोई गम छुपा रहे थे !!
बारिश में भीग के आये थे मिलने , शायद वो आंसु छुपा रहे थे !
इकरार में शब्दों की एहमियत नही होती,
दिल के जज़बात की आवाज़ नही होती,
आँखें बयान कर देती हैं दिल की दास्तान,
मोहब्बत लफज़ो की मोहताज़ नही होती!
वो अपनी ज़िंदगी में हुआ मशरूफ इतना;
वो किस-किस को भूल गया उसे यह भी याद नहीं।