खुसनसीब हैं वो जिनके घर रिश्ते आते हैं
वरना हमारे घर तो सिर्फ वारंट ही आते हैं
चलो एक कप चाय बनाते है,
तुम चीनी बन कर घुल जाना,
हम पत्ति बनकर रंग जमाते है।
चिरागों को आंखों में महफूज रखना,बड़ी दूर तक रात ही रात होगी,मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी,किसी मोड़ पर, फिर मुलाकात होगी।
चिरागों को आंखों में महफूज रखना,
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी,
मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी,
किसी मोड़ पर, फिर मुलाकात होगी।
शाम भी खास है, वक़्त भी खास है,
तुझको भी एहसास है, तो मुझको भी एहसास है,
इससे जयादा मुझे और क्या चाहिए,
जब मैं तेरे पास, और तु मेरे पास है
सदा दूर रहो ग़म की परछाइयों से,
सामना ना हो कभी तन्हाइयों से,
हर अरमान हर ख़्वाब पूरा हो आपका,
यही दुआ है दिल की गहराइयों से।