और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया
आप की याद आती रही रात भर
चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर
रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चाँद
अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई
वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
कितनी जल्दी ज़िन्दगी गुज़र जाती है,प्यास भुझ्ती नहीं बरसात चली जाती है,तेरी याद कुछ इस तरह आती है,नींद आती नहीं मगर रात गुज़र जाती है।