वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
उठा लो दुपट्टे को ज़मीन से कहीं दाग़ न लग जाए,
पर्दे में रखो चेहरे को कहीं आग न लग जाए।
वो शायद मतलब से मिलते हैं,
मुझे तो मिलने से मतलब है.!
कुछ लम्हे और उसका साथ चाहता था,
आँखों में थमी वो बरसात चाहता था !!
जानता हु बहुत चाहती थी वो,
मगर उसकी जुबान से 1 बार इज़हार चाहता था...!!
वही शख्स आकेला छोड गया मुझे इस दुनिया कि भीड मेजिसने दुनिया की भीड़ से चुन के मुझे अपना बनाया था