दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
आज की रात भी तन्हा ही कटी
आज के दिन भी अंधेरा होगा
दिल से चाहते हैं हर सुबह उठाये तुमको
प्यार से दिल के करीब लाये तुमको
कोई मौका न छोड़े कभी भी हम
हर सुबह शायरी से उठाये तुमको
Good morning Jaan
किसके बारे में सोचती हैं दोस्त तू तो बिल्कुल बदल गई हैं दोस्त
तेरी खातिर तेरी ख़ुशी के लिए, मैंने सिगरेट भी छोड़ दी हैं दोस्त
एक शिकायत मुझे भी हैं तुझसे, तू बहुत झूठ बोलती हैं दोस्त.