मुद्दत हुई इक शख़्स ने दिल तोड़ दिया था
इस वास्ते अपनों से मोहब्बत नहीं करते
वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
मेरी तन्हाई का जो क़िस्सा है,
उसमें चाय का एक अहम हिस्सा हैं.
वो बेवफा न था यूँ ही बदनाम हो गया 'फ़राज़'
हजारों चाहने वाले थे वो किस किस से वफ़ा करते
छोटी सी है है ज़िन्दगी तो तकरार किस लिये,
रहते हो दिल में तो फिर दिवार किस लिए.
रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने,कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने,हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो,अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।