हर चीज़ बिकने लगी है किश्तों परख्वाहिशों पे लगाम कोई कैसे लगाये?
रूठे तो इक लफ्ज़ नहीं कहती है मुंह सेबस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है..
"आप तो मोहब्बत कीजिए साहेबनाराज़ तो हमसे ज़माना रहता है.!"
"तुम रोज थोड़ा मिलना,
बहुत बाकी रह जाना,
तुम्हें खोजते-खोजते,
एक दिन खुद को पा लूँगा l"
हजारों से करूं इश्क़,ये फितरत नहीं हमारी,पर तुमसे इश्क़ मैं, हजारों बार कर जाऊँगा l
किसानो के चेहरे पर जो झुर्रियाँ है,
वही भारत के तरक्की की सुर्खियाँ है.