हर चीज़ बिकने लगी है किश्तों परख्वाहिशों पे लगाम कोई कैसे लगाये?
"आप तो मोहब्बत कीजिए साहेबनाराज़ तो हमसे ज़माना रहता है.!"
दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
किसानो के चेहरे पर जो झुर्रियाँ है,
वही भारत के तरक्की की सुर्खियाँ है.
वक़्त नूर को बेनूर बना देता है, छोटे से जख्म को नासूर बना देता है,
कौन चाहता है अपनों से दूर रहना पर वक़्त सबको मजबूर बना देता है.