रिहा कर ख़ूबसूरत दिखने की चाहत से मुझे..ऐ आईने तू मेरी सादगी को ज़मानत दे दे
रिहा कर ख़ूबसूरत दिखने की चाहत से मुझे..
ऐ आईने तू मेरी सादगी को ज़मानत दे दे
उठना, गिरना ,संभलना चलता रहता है ,यही ज़िन्दगी है ज़नाब !सांसो का आना जाना जब तक है ,हंसना ,रोना ,मुस्कुराना चलता रहता है l
आशिक़ी में बहुत ज़रूरी है
बेवफ़ाई कभी कभी करना
तुमसे ही रूठ कर तुम्ही को याद करते हैं
हमे तो ठीक से नाराज़ होना भी नही आता