जाने अब कौन आँखों से निकल,कागज़ पे आने वाला है,सुना हैं मेरा मेहबूब फिर,कोई तस्वीर बनाने वाला है l
"अखिल प्रेम की कल्पना है यही,प्रेम की है जग में, सत्या जो सही,मौन की अपनी भाषा, होती प्रिय,प्रेम की बात तो, प्रेम से ही कही l"
Pyar Bhari shayari
वो गले से लिपट के सोते हैं
आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
तेरे पास में बैठना भी इबादत
तुझे दूर से देखना भी इबादत …….
न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा
तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत…