न जिद है न कोई गुरूर है हमे,बस तुम्हे पाने का सुरूर है हमे,इश्क गुनाह है तो गलती की हमने,सजा जो भी हो मंजूर है हमे…
दिल का दीपक कुछ ऐसे जल जाये,पत्थर में भी मोह्हबत उतर आये
उदासियाँ तो चहरे पे धूल की तरह है
हम अंदर से तो कल भी वही थे आज भी वही है
मेरी तन्हाई का जो क़िस्सा है,
उसमें चाय का एक अहम हिस्सा हैं.
रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने,कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने,हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो,अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।