नए सप्ताह में नए दिन की शुरुआत करते है ,मिलते है किसी मोड़ पर फिर नई बात करते है l
सुना था बदल जाती है आदतें भी वक़्त के साथ,पर रूह तो जिस्म छोड़ती है बस मौत आने के बाद,
"ना जाने कब फिर शहर बंद हो जाये,
एक बार नज़र भर देखना चाहता हूँ,
कई दिनों से एक ख़त किताबों में है,
अब उसके हाथो में दे देना चाहता हूँ l"
भूल शायद बहुत बड़ी कर ली
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिस को गले लगा लिया वो दूर हो गया