जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाए रात भर…
भेजा वही काग़ज़ उसे हम ने लिखा कुछ भी नहीं!
उनके लिए जब हमने भटकना छोड़ दिया,
याद में उनकी जब तड़पना छोड़ दिया,
वो रोये बहुत आकर तब हमारे पास,
जब हमारे दिल ने धडकना छोड़ दिया
बे-फिजूली की जिंदगी का सिल-सिला ख़त्म,जिस तरह की दुनिया उस तरह के हम।
एक हम हैं, जो
समझे नहीं खुद को अब तक।
और एक दुनिया है, जो
पता नहीं हमें क्या-क्या समझती है।
“देर रत जब किसी की याद सताए,
ठंडी हवा जब जुल्फों को सहलाये.
कर लो आंखे बंद और सो जाओ क्या पता,
जिसका है ख्याल वो खवाबों में आ जाये.”